समकालीन भारतीय भाषाओं में फिल्म प्रदर्शन श्रृंखला में मलयालम फीचर फिल्म ‘जल्लीकट्टू’ का प्रदर्शन

समकालीन भारतीय भाषाओं में फिल्म प्रदर्शन श्रृंखला में मलयालम फीचर फिल्म ‘जल्लीकट्टू’ का प्रदर्शन

देहरादून, 11 जुलाई, 2025. दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज सायं समकालीन भारतीय भाषाओं में फिल्म प्रदर्शन श्रृंखला के प्रथम भाग के तहत दर्शकों के मध्य मलयालम फीचर फिल्म जल्लीकट्टू का प्रदर्शन किया गया.

फ़िल्म प्रदर्शन से पूर्व सुपरिचित फ़िल्म विशेषज्ञ अजय गोविन्द ने कहा कि यह लिजो जोस पेलिसेरी द्वारा निर्देशित एक मलयालम फीचर फिल्म है. इस फ़िल्म को हिंदी में डब किया गया है और इसकी अवधि 87 मिनट है. उन्होंने कहा कि फिल्म में अति यथार्थ-वादी विषय-वस्तु प्रदर्शित हुईं है,इस संदर्भ में दर्शकों को अपने विचार और विवेक का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। फ़िल्म का पर्दे पर प्रदर्शन निकोलस हॉफलैंड ने किया.

जल्लीकट्टू फिल्म की कहानी एक कसाईखाने से भागकर पूरे गांव में दहशत फैलाने वाली भैंस के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में, एक भैंस भाग जाती है और ग्रामीण उसे पकड़ने के लिए निकल पड़ते हैं, जिससे अराजकता और हिंसा फैल जाती है। यह कहानी मनुष्य और जानवर के बीच के संबंधों, मर्दानगी और जंगलीपन पर एक टिप्पणी है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे मनुष्य भी जंगली और हिंसक हो सकता है।

कुल मिलाकर यह फिल्म मानव शक्ति और जंगलीपन पर एक टिप्पणी प्रस्तुत करती है, जो सन्देश देती है कि कैसे मनुष्य भी अपनी शक्ति से अनजान होकर विनाशकारी हो सकता है। जल्लीकट्टू फिल्म को समीक्षकों द्वारा इसकी सिनेमैटोग्राफी, साउंड डिज़ाइन और कहानी प्रस्तुत करने के तरीकों के लिए सराहना दी गयी है.

फिल्म प्रदर्शन के बाद फ़िल्म निर्माण जगत से जुड़े अजय गोविन्द के साथ एक अनौपचारिक बातचीत भी हुई और दर्शकों ने सवाल-जबाब भी किये. फ़िल्म प्रदर्शन के दौरान अनेक फ़िल्म प्रेमी, लेखक, रंगकर्मी, युवा और अन्य प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे.