रैफेल द्वारा दून पुस्तकालय में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगता सप्ताह पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन
देहरादून, 4 दिसम्बर, 2025. दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में आज रैफेल संस्था द्वारा दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के सभागार में एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। यह नाटक अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगता सप्ताह पर किया गया । इस नुक्कड़ नाटक का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगता के बारे में जागरूकता फैलाना, इससे जुड़ी उपेक्षा व मिथकों/भ्रमों को दूर करना तथा उसके निदान एवं उपचार के संबंध में लोगों को समुचित जागरूकता व सही जानकारी उपलब्ध कराना था।
यह लघु नाटक पुस्तकालय के द्वितीय तल के पठन कक्ष में फ़्लैश-मॉब शैली में भी प्रस्तुत किया गया। यह अनपेक्षित प्रस्तुति वहाँ अध्ययन कर रहे पाठकों को आश्चर्यचकित करते हुए दिव्यांगता और सुगमता (Accessibility) पर सोचने के लिए प्रेरित करने हेतु विशेष रूप से की गई थी।
कार्यक्रम के दौरान एक रोचक और विचारोत्तेजक संवाद भी सामने आया। दून इंटरनेशनल स्कूल के एक छात्र ने तर्क दिया कि दिव्यांग बच्चों को नियमित विद्यालयों में शामिल करने के बजाय उनके लिए विशेष विद्यालय होने चाहिए। इस पर एक अन्य छात्र ने नई शिक्षा नीति का हवाला देते हुए कहा कि समावेशी और समग्र शिक्षा अनिवार्य है तथा दिव्यांग और सामान्य क्षमता वाले बच्चों को साथ पढ़ना चाहिए। यह संवाद कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा, जिसने उपस्थित लोगों को शिक्षा के समावेशी दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया।
दोनों प्रस्तुतियाँ रैफेल के विशेष शिक्षकों तथा दिव्यांग बालिका सोना पटेल द्वारा की गईं।
कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा और वहाँ उपस्थित जनसमुदाय को दिव्यांगता के प्रति प्रभावी रूप से संवेदनशील किया गया।
रैफेल की स्थापना 1959 में देहरादून (उत्तराखंड) में ग्रुप कैप्टन लॉर्ड ज्यॉफ्री लियोनार्ड चेशायर ऑफ वुडहॉल, VC, OM, DSO, DFC एवं उनकी पत्नी बैरोनेस सू राइडर ऑफ वारसा, CMG, OBE द्वारा की गई थी। उनका उद्देश्य अत्यंत मानवीय एवं सार्वभौमिक था — मानव पीड़ा का निवारण।
रैफेल एक विधिवत पंजीकृत परोपकारी संस्था है, जो समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों/बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। संस्था अपने सभी लाभार्थियों को सुविधाएँ एवं सेवाएँ अत्यंत न्यून शुल्क पर प्रदान करती है और वित्तीय सहयोग हेतु अपने दाताओं पर निर्भर है।
नाटक प्रस्तुति के दौरान दून पुस्तकालय के सैकड़ो युवा पाठकों को इस नुक्कड़ नाटक ने गहराई से प्रभावित किया.











