उत्तराखण्ड @25 : लुकिंग बैक-लुकिंग फॉरवर्ड पुस्तक का मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पण
देहरादून, 30 नवम्बर, 2025। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज रविवार को प्रातः 10:00 बजे मुख्यमंत्री आवास में “उत्तराखण्ड @25 : लुकिंग बैक-लुकिंग फॉरवर्ड” पुस्तक लोकार्पण किया। लोकापर्ण का यह कार्यक्रम मुख्य मंत्री आवास स्थित सभा कक्ष में किया गया.
उत्तराखण्ड राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से उत्तराखण्ड@25 शीर्षक से एक पुस्तक प्रकाशित करने की योजना का निर्णय लेते हुए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, उत्तराखण्ड इकाई को भी इससे जोड़ते हुए उसे पुर्नजीवित करने का प्रयास किया गया.
पुस्तक लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक राज्य की अब तक की प्रगति पर उत्कृष्ट विश्लेषण प्रस्तुत करने के साथ ही आने वाले समय में राज्य के समग्र विकास को एक नई दिशा भी प्रदान करेगी। पुस्तक में शासन-प्रशासन, आर्थिक विकास, पर्यावरण संतुलन, ग्रामीण पलायन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कृषि, संस्कृति और पत्रकारिता जैसे अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने गहन विचार प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक नीति-निर्माण और शोधकर्ताओं के लिए लाभदायक सिद्ध होगी और उत्तराखंड के सतत, समावेशी और समग्र विकास की दिशा में योगदान देने के लिए लोगों को प्रेरणा देगी। इसके प्रकाशन के लिए उन्होंने दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र तथा भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के पदाधिकारियों, लेखकों और संपादक मंडल का आभार भी व्यक्त किया। मुख्य मंत्री ने दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यों पर सन्तोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह संस्थान पुस्तक पठन-पाठन, युवाओं के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने अकादमिक गतिविधियों व बौद्विक विचार विमर्श का एक आदर्श केन्द्र के रूप में अपना स्थान बना रहा है। उन्होनें यथासम्भव सरकार की ओर से इसे सहयोग देने की भी बात की ।
मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में सरकार द्वारा चलायी जा रही कई योजनाओं का भी जिक्र किया। कहा कि उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा में राज्य ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की । नीति आयोग द्वारा जारी सतत् विकास लक्ष्यों में राज्य को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में “अचीवर्स” और स्टार्टअप रैंकिंग में “लीडर्स” की श्रेणी प्राप्त हुई है। बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी आई। राज्य को लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस में “अचीवर्स” श्रेणी और सिंगल विंडो सिस्टम में “टॉप अचीवर्स” की श्रेणी हासिल हुई है। पर्यटन के क्षेत्र में भी राज्य को अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मत्स्य विकास में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य का राष्ट्रीय पुरस्कार और किसानों की आय की वृद्धि दर में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता लागू करने का गौरव भी उत्तराखंड को ही प्राप्त हुआ है।
उल्लेखनीय है कि आज लोकार्पित की गयी इस पुस्तक में उत्तराखंड राज्य की विगत 25 वर्षों की विकास यात्रा तथा भविष्य की सम्भावनाओं पर इस पुस्तक में विषय विशेषज्ञों तथा अनुभवी विद्वानों द्वारा 7 विषयवार खण्डों के अंतर्गत अंग्रेजी और हिंदी माध्यम में कुल 28 आलेख संकलित हैं। इस पुस्तक का मुख्य सम्पादन श्री नृप सिंह नपलच्याल, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन तथा सम्पादक मंडल के दो अन्य सदस्यों – श्री एन.रवि शंकर, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन तथा डाॅ. सुधा रानी पाण्डेय, पूर्व कुलपति, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय की कुशल देख-रेख में किया गया है।
अनुभवी प्रशासकों, शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों, वन अधिकारियों, रक्षा एवं सामरिक विश्लेषकों, पत्रकारों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और पेशेवर लेखकों ने अपने सार गर्भित आलेखों के माध्यम से उत्तराखंड राज्य की एक चौथाई सदी की यात्रा पर गहन प्रकाश डालने का प्रयास किया है। प्रस्तुत पुस्तक में विद्वत लेखकों ने जहां विकास उपलब्धियों को रेखांकित किया है वहीं इसकी तमाम चुनौतियों और खतरों की भी पड़ताल की है और साथ में कई कारगर समाधान भी सुझाए हैं। एक तरह यह पुस्तक उत्तराखंड के भविष्य के बारे में भी बात करती प्रतीत होती है।
इस महत्वपूर्ण संदर्भ पुस्तक में लोक प्रशासन एवं सुशासन, आर्थिक विकास, विकास और पर्यावरण के मध्य सचेत संतुलन, विकास की दिशा, पहाड़ के ग्रामीण इलाकों से बड़े पैमाने पर पलायन और उससे जुड़ी आन्तरिक सुरक्षा जैसे बिन्दुओं पर विशेष बल दिया गया है। सतत पर्यावरण, वन्य जीव तथा मानव-वन्य जीव संघर्ष की चुनौतियां, जलवायु परिवर्तन, आपदाएं, चुनौतियां और उसका निवारण, समुदाय के मूल भूत तत्वों स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य अवस्थापना संरचना सुविधाओं पर विशेष उल्लेख किया गया है। इसके अलावा उत्तराखण्ड की महिलाओं की स्थिति, परम्परागत ज्ञान, खेती, बागवानी व कृषि निवेश पर भी लेखकों ने अपने सारगर्भित विचार प्रकट किये हैं। प्रस्तुत पुस्तक में साहित्य, कला, संस्कृति व पत्रकारिता जैसे विषयों पर भी पृथक से उल्लेख किया गया है।
उत्तराखण्ड की 25 सालों की विकास यात्रा पर अनुभवी विद्वत जनों के लिखे यह सभी आलेख उपयोगी हैं, जो इस राज्य के आगामी 25 सालों के भविष्य निर्धारण में नीति नियन्ताओं व योजनाकारों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेंगे। आशा की जानी चाहिए कि एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के तौर पर यह पुस्तक विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
कार्यक्रम में दून पुस्तकालय के मानद निदेशक श्री एन.रवि शंकर ने मुख्य मंत्री और, मंचासीन, लेखक गणों और उपस्थित लोगों का हार्दिक स्वागत किया. इस अवसर पर पुस्तक के मुख्य संपादक श्री एन.एस. नपलच्याल ने पुस्तक के संदर्भ में परिचय देते हुए उसके विषय वस्तु, विशेषताओं तथा लेखक गणों का उल्लेख किया। कार्यक्रम के अन्त में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के अध्यक्ष प्रो. बी.के. जोशी ने अपने अध्यक्षीय व धन्यवाद वक्तव्य में केन्द्र का ऐतिहासिक परिचय, परिचालन व गतिविधियों को बताया और केन्द्र के सुचारू संचालन और भावी आवश्यकताओं के लिए सरकार से समुचित सहयोग की अपील की. उन्होंने इस संदर्भ में माननीय मुख्य मंत्री को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से एक ज्ञापन भी दिया। कार्यक्रम का संचालन केंद्र के प्रोग्राम एसोसिएट चन्द्रशेखर तिवारी ने किया.
इस अवसर पर डॉ. सुधारानी पांडेय, पूर्व मुख्य सचिव श्री इन्दु कुमार पाण्डेय, श्रीमती राधा रतूड़ी, पूर्व डीजीपी श्री अनिल रतूड़ी, जयराज, समीर सिन्हा, प्रो.डी.आर पुरोहित, पंकज नैथानी, डॉ.आर.पी.ममगाई, आलोक बी.लाल, बिनीता शाह, मंजू काला, डॉ. एस.एस. नेगी, डॉ. ज्योतिष घिल्डियाल लवतीना मोदी, कर्नल एस.एस. रौतेला, डॉ.लालता प्रसाद, डॉ. अरुण कुकसाल, दीवान बोरा, जगदीश सिंह महर, पंकज शर्मा, राकेश कुमार सहित पुस्तक के लेखक गण एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित थे।











