डाक्यूमेंट्री फिल्म वाॅल स्टोरीज और माहेश्वता देवी का  प्रदर्शन

डाक्यूमेंट्री फिल्म वाॅल स्टोरीज और माहेश्वता देवी का प्रदर्शन

देेहरादून, शनिवार, 20 मई, 2023। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से लैंसडाउन चौक स्थित पुस्तकालय के सभागार में आज अपराह्न चार बजे सुपरिचित लेखिका और फिल्म निर्देशक सुश्री शाश्वती तालुकदार की दो डाक्यूमेंट्री फिल्म वाॅल स्टोरीज और माहेश्वता देवी का प्रदर्शन किया गया।
वाॅल स्टोरीज फिल्म वस्तुतः पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र स्थित में गढ़वाल अंचल की ऐतिहासिक कला यात्रा का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती है। गंगा और यमुना नदियों के मध्य दून घाटी के ऐतिहासिक भवनों की दीवारों पर उकेरी गई विविध भित्ति चित्रों के माध्यम सेे स्थानीय जन समाज के जनजीवन, इतिहास और संस्कृति की आकर्षक गाथा को यह फिल्म बखूबी से प्रदर्शित करती है।एक पर्वतीय महिला के वेश में नूरजहाँ के चित्र से आरम्भ होकर, उर्दू के पहले नाटक इंदर सभा के सत्रहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक के ये भित्ति चित्र धर्म और इतिहास से सन्दर्भित कला की निम्न और उच्च की सीमाओं को चुनौती देते हैं। फिल्म वॉल स्टोरीज काल्पनिक वार्तालापों का उपयोग करती है, चित्रों के विषय को जीवंत रूप में मानती है। वॉल स्टोरीज विश्वभर के कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित हुई है।स्पेन के प्रतिष्ठित ह्युस्का इंटरनेशनल फिल्म महोत्सवमें इसका प्रीमियर शो हुआ है और रोमानिया के बुखारेस्ट फिल्म कला महोत्सव में इसे ‘क्रिएटिविटी अवार्ड‘ मिल चुका है।
महाश्वेता देवी डॉक्यूमेंट्री फिल्म लेखिका महाश्वेता देवी के जीवन और उनके द्वारा किये गये रचनात्मक कामों के बारे में शानदार तरीके से बताने में समर्थ दिखती है। फिल्म में उथल-पुथल भरे बदलाव की आधी शताब्दी के केंद्र में, महाश्वेता देवी का जीवन काल ब्रिटिश दौर, स्वतंत्रता, और औपनिवेशिक उथल-पुथल के बाद के पचास वर्षों तक फैला हुआ दिखाई देता है। उनके लेखन ने भारतीय साहित्य को एक नया जीवन प्रदान दिया है। साथ ही लेखकों, पत्रकारों और फिल्म निर्माताओं की दो पीढ़ियों को प्रेरित किया है। पिछले दो दशकों से एक प्रसिद्ध लेखिका और अथक कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने भारत के डी-नोटिफाइड जनजातियों – खानाबदोश और आदिवासी समूहों के पक्ष में लड़ाई लड़ी है, जिन्हें ब्रिटिश औपनिवेशिक राज्य द्वारा प्राकृतिक अपराधी करार दिया गया था और आज भी इन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। सही मायने में एक अनौपचारिक शैली में, यह फिल्म इस बात की पड़ताल करती है कि महाश्वेता का दैनिक जीवन और लेखन भारत के मूल निवासियों के अधिकारों के लिए किस हद तक समर्पित रहा था। इस फिल्म में बुधन थियेटर का प्रदर्शन शामिल है।
यह विशेष बात है कि फिल्म निर्देशक व निर्माता, शाश्वती तालुकदार, देहरादून से हैं। उन्हांेने टेम्पल यूनिवर्सिटी, फिलाडेल्फिया, यूएसए से फिल्म और वीडियो कला में एमएफए और जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। उन्होंने न्यूयॉर्क शहर, यूएसए में माइकलमूर (1999) के टीवी शो में फिल्म और टेलीविजन के सहायक संपादक के रूप में काम करना शुरू किया था तब से वे यूयॉर्क में केबल विजन और दक्षिण कोरिया में केबीएस।एचबीओ, बीबीसी, लाइफटाइम, सनडांस और के लिए परियोजनाओं पर काम कर चुके हैं। उनकी फिल्में बुसान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव सहित मार्गरेट मीड महोत्सव में प्रदर्शित हो चुकी हैं। उनकी प्रायोगिक फिल्में और वीडियो कला दुनिया भर की दीर्घाओं और संग्रहालयों में नियमित रूप से दिखाई जाती हैं। फिल्म निर्देशक व निर्माता शाश्वती तालुकदार की फिल्मों में पुरस्कार विजेता वृत्तचित्र प्लीज डोंट बीट मी सर ! तथा वाॅल स्टोरीज शामिल हैं।
फिल्म प्रदर्शन से पूर्व निर्देशक शाश्वती तालुकदार ने फिल्म के बारे में जानकारी दी। फिल्म प्रदर्शन के बाद दर्शकों ने उनसे फिल्म के कथानक और उससे जुड़े विविध सवाल-जबाव भी किये। इस अवसर पर देहरादून शहर के कई फिल्म प्रेमी, लेखक और पुस्तकालय के युवा पाठक सहित पूर्व मुख्य सचिव एस के दास, निकोलस हाॅफलैण्ड, डाॅ. योगेश धस्माना, बिजु नेगी , डॉ कुसुम नौटियाल के अलावा अन्य लोग इन वृत्तचित्र फिल्मों के प्रदर्शन के समय उपस्थित रहे।
WALL STORIES
‘Wall Stories’ is about how a dispossessed saint, a newly minted gentry and generations of painters created a syncretic culture in the Western Himalayas. Inventive, witty and playful, the film subverts the usual narratives about society and history in a valley that was on the edge of the Mughal and British Empires. ‘Wall Stories’ is a pictorial journey through the Garhwal region in the Western Himalayas. Centered around Dehradun between the rivers Ganga and Yamuna, it tells the fascinating story of the history and culture of its people through mural paintings found in the area, and the daily life that is lived around them. Going from a portrait of Noor Jehan dressed as a Pahari lady, to depictions of the ‘Indar Sabha’ the first Urdu full length
play, and one of the richest repositories of illustrations of the Janmsakhi (the life of Guru Nanak), these painting from the end of the 17th to the 19th century defy the boundaries of low art and high art, religion and received history. ‘Wall Stories’ uses imaginary conversations, treats the subject of the paintings as living subjects and plays with its subject matter to explore the space and meaning created in the everyday lives of the people who encounter these paintings.
Wall Stories has shown in several international film festivals all over the world,premiering at the prestigious Huesca International Film Festival in Spain, and has won the ‘Creativity Award’ at the Film Art Festival in Bucharest, Romania.
MAHASWETA DEVI: WITNESS, ADVOCATE, WRITER
“Language is a weapon, its not for shaving your armpits” says eminent writer Mahasweta Devi in this documentary about her life and work. At the center of a half-century of tumultuous change, the lifetime of Mahasweta Devi has spanned the British period, Independence, and fifty years of postcolonial turmoil. Her writing has given Indian literature a new life and inspired two generations of writers, journalists and filmmakers. A celebrated writer and tireless activist; for the last two decades, she has led a battled on the behalf of the De-notified tribes of India —indigenous groups who were branded “natural criminals” by the British Colonial State, who face discrimination to this day, despite being “de-notified.” Informal in style, this video explores how Mahasweta’s daily life and writing is a part of her life as a tireless worker for the rights of the aboriginal people’s of India. MAHASWETA DEVI, is distributed by Documentary Education Resources in Boston, USA, and is in the libraries of several universities in them United States.
SHASHWATI TALUKDAR
Shashwati Talukdar, Director/Producer, is from Dehradun, and has an MFA in Film and Video Arts from Temple University, Philadelphia, USA and an MA in Mass Communications from Jamia Millia Islamia. She began working in film and television as an assistant editor for a TV show by Michael Moore (1999) in New York City, USA. Since then she has worked on projects for HBO, BBC, Lifetime, Sundance and Cablevision in New York, and KBS in South Korea. Her films have screened at venues including the Busan International Film Festival, Margaret Mead Festival. Her experimental films and video art isregularly shown in galleries and museums around the world, including the Whitney Biennial. She has been supported by entities including the Tribeca Foundation, Asian Cine Fund in Busan, the Jerome Foundation, New York State Council on the Arts among others. Her projects include the prize winning feature length documentary, ‘Please Don’t Beat Me, Sir!’ ‘Wall Stories,’ a hybrid film about mural paintings in Garhwal, supported by the India Foundation of the Arts. Being fluent in two Indian languages, and with basic competency in Mandarin Chinese, has allowed Shashwati to work on projects set in East and South Asia.