तृतीय सुरजीत दास स्मृति व्याख्यान – 2026  में पी. साईनाथ का व्याख्यान

तृतीय सुरजीत दास स्मृति व्याख्यान – 2026  में पी. साईनाथ का व्याख्यान

देहरादून, 8 फरवरी, 2026. दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज सायं तृतीय सुरजीत दास स्मृति व्याख्यान – 2026 आयोजित किया गया. वरिष्ठ पत्रकार पी. साईनाथ ने असमानता के युग में भारत विषय पर व्याख्यान दिया. व्याख्यान में पी. साईं नाथ ने मुख्य रुप से पत्रकारों, लेखकों, फिल्म निर्माताओं को किन विषयों पर लिखना चाहिए? इस बात को केन्द्रित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतराष्ट्रीय स्तर की फिल्म निर्माता, लेखिका शाश्वती तालुकदार ने की.

कार्यक्रम से पूर्व रविन्द्र संगीत तथा स्व. सुरजीत दास पर केंद्रित लघु ऑडियो विजुवल भी प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के निदेशक श्री एन.रविशंकर ने पी. साईं नाथ व उपस्थित लोगों का स्वागत किया और श्रीमती विभापुरी दास ने श्री पी साईंनाथ को प्रतीक चिन्ह भेंट किया. केन्द्र के अध्यक्ष प्रो. बी के. जोशी ने सुरजीत दास स्मृति व्याख्यान श्रृंखला का परिचय और उसकी प्रांसगिकता देते हुए दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की गतिविधियों से अवगत कराया.कार्यक्रम का संचालन निकोलस हॉफलैण्ड ने किया.

व्याख्यान में बोलते हुए पीं साईंनाथ ने कहा कि

भारत में असमानता का स्तर अब ब्रिटिश राज के चरम काल, 1920 के दशक के स्तर के बराबर है, और संभवतः उससे भी आगे निकल गया है। उन्होनें असमानता पर अपनी बात रखी और विचार व्यक्त किये कि आज मीडिया कवरेज का एक बड़ा हिस्सा – जहाँ भी यह होता है – अति-अमीरों की सफलता की कहानियों का गुणगान करने तक ही दिखाई देता है.

उन्होनें यह चिंता व्यक्त की और कहा एमजीएनआरईजीए जैसी ग्रामीण जन की योजनाओं के सीमित रह जाने पर अधिक गंभीर चर्चा की जरूरत है जो अक्सर होती नहीं दीखती. देखा जाय तो यह योजना कोरोना वायरस महामारी के दौरान लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा बनी हुई थी। मनरेगा योजना को कमजोर नहीं सशक्त बनना आवश्यक है।

पी साईनाथ बोले, संविधान की भावना को मूर्त रूप प्रदान करने से समाजवाद की अर्थव्यवस्था आकार ले सकती है। . उन्होने कहा कि भारत की सभी स्थानीय बोली भाषाएं पर्याप्त सम्मान का अधिकार रखती हैं। इसके लिए जमीनी स्तर पर लाइब्रेरी आंदोलन चलाया जाना समाज संस्कृति के लिए हितकारी होगा।

पत्रकरिता,विकास और जनसरोकार के विविध मुद्दों पर उन्होनें आंकड़ो व रेखाचित्रों के माध्यम से विश्लेषण करते हुए अपने तथ्य श्रोताओं के साथ साझा किये। ग्रामीण जन, किसान, मजदूरों के हित और उनकी स्थिति के संदर्भ में पी.साईनाथ ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाये कि चिंतित पत्रकारों, स्वतंत्र मीडिया और अन्य लोगों को क्या करना चाहिए. केन्द्र के खचाखच भरे सभागार में पी.साईंनाथ के व्याख्यान के पश्चात कुछ लोगों ने सवाल जबाब भी किये.

पलगुम्मी साईनाथ का जन्म 13 मई 1957 को हुआ था. वह भारतीय स्तंभकार और चर्चित पुस्तक “एवरीबॉडी लव्स अ गुड ड्रॉट” के लेखक हैं। उन्होंने ग्रामीण भारत पर व्यापक रूप से लिखा है, और उनके लेखन की प्रमुख रुचियां गरीबी, संरचनात्मक असमानताएं, जातिगत भेदभाव और किसानों के विरोध प्रदर्शन हैं।

उन्होंने 2014 में पीपुल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया (पीआरआई) की स्थापना की, जो एक ऑनलाइन मंच है और भारत में सामाजिक और आर्थिक असमानता, ग्रामीण मामलों, गरीबी और वैश्वीकरण के प्रभावों पर केंद्रित है। वे ट्राइकंटिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च में वरिष्ठ फेलो रहे हैं और इससे पूर्व 2014 में त्यागपत्र देने पहले द हिंदू में ग्रामीण मामलों के संपादक थे।

उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने उन्हें “अकाल और भूख के विश्व के महान विशेषज्ञों में से एक” बताया है। उनकी पुस्तक “एवरीबॉडी लव्स अ गुड ड्रॉट” एक पत्रकार के रूप में उनके क्षेत्र अध्ययनों का संकलन है और भारत में ग्रामीण अभाव के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित है।

सुरजीत दास व्याख्यान के अवसर पर, राजीव लोचन साह, शहाब नकवी, गौरव मिश्रा, दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के डॉ.पंकज नैथानी, चन्द्रशेखर तिवारी, डॉ. डी. के. पाण्डे, डॉ. लालता प्रसाद, डॉ. योगेश धस्माना जेबी गोयल, जगदीश महर, योगिता थपलियाल, मेघा एन.विल्सन, सुन्दर विष्ट, अन्य लाइब्रेरी प्रोफेसनल सहित शहर के अन्य लोगों में बिजू नेगी, राकेश अग्रवाल, इरा चौहान, जगदम्बा प्रसाद मैठाणी, रवि चोपड़ा, नवीन नौटियाल, योगेन्द्र नेगी, देवेन्द्र काण्डपाल, पी. सी. तिवारी, डॉ सुशील उपाध्याय, श्रीमती शांता एन शंकर, मधन बिष्ट, राकेश कुमार, राजीव नागिया, अरविंद शेखर,हिमांशु आहूजा, चारू तिवारी के अलावा अनेक लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, बौद्धिक चिंतक,सामाजिक कार्यकर्ता व अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।