शाम सवेरे नामक पुस्तक का लोकार्पण दून पुस्तकालय में
देहरादून, 15 जनवरी, 2026. उदयन केयर द्वारा संचालित उदयन शालिनी फेलोशिप (USF) कार्यक्रम के अंतर्गत एक प्रेरणादायक पुस्तक लोकार्पण व बातचीत का एक कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र , देहरादून में प्रातः 11:00 बजे से 1:00 बजे तक किया गया।
इस अवसर पर “शाम सवेरे नामक पुस्तक का लोकार्पण किया गया, जो उदयन शालिनी फेलोशिप की 17 शालिनियों द्वारा लिखी गई लघु कहानियों का शानदार संग्रह है। पुस्तक में संकलित कहानियां बालिकाओं के जीवन अनुभवों, संघर्षों, सपनों, सामाजिक संवेदनाओं और उनकी रचनात्मक सोच को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं। ये रचनाएँ कहीं यथार्थ से जुड़ी हैं तो कहीं कल्पना के माध्यम से समाज को सोचने समझने पर मजबूर करती हैं।
उदयन शालिनी फेलोशिप कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2002 में दिल्ली में 72 बालिकाओं के साथ की गई थी। वर्ष 2008 में इस कार्यक्रम का विस्तार देहरादून में 210 बालिकाओं के साथ हुआ। आज यह कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और वंचित एवं संसाधनहीन वर्ग की बालिकाओं को उच्च शिक्षा, नेतृत्व विकास, जीवन कौशल, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रहा है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि माननीय श्रीमती कुमकुम रानी, अध्यक्ष SCDRC, उत्तराखंड ने अपने संबोधन में कहा कि उदयन शालिनी फेलोशिप जैसे कार्यक्रम बालिकाओं को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अपनी बात को निर्भीकता से रखने का साहस भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि “शाम सवेरे” जैसी पुस्तक इस बात का प्रमाण है कि यदि बालिकाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे समाज के लिए सकारात्मक बदलाव की वाहक बन सकती हैं। उन्होंने शालिनियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान शालिनियों ने अपने लेखन अनुभव साझा किए। यह आयोजन बालिकाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को सम्मान देने का एक सशक्त मंच सिद्ध हुआ। उदयन केयर का यह प्रयास यह संदेश देता है कि सशक्त शिक्षा से ही सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
इस दौरान के शहर के अनेक प्रबुद्ध लोग, युवा छात्र, सामाजिक कार्यों से जुड़े लोगों सहित पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी, संग्रहालय प्रभारी डॉ. लालता प्रसाद, जगदीश सिंह महर आदि उपस्थित रहे.











