सरोजिनी नायडू की शताब्दी वर्ष पर व्याख्यान

सरोजिनी नायडू की शताब्दी वर्ष पर व्याख्यान

देहरादून, 30 दिसंबर, 2025. दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज सांय सरोजिनी नायडू की शताब्दी वर्ष पर उनकी याद में एक व्याख्यान का आयोजन किया गया. इसके वार्ताकार भारत के सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अनिल नौरिया रहे. कार्यक्रम सत्र की अध्यक्षता श्रीमती विभा पुरी दास पूर्व सचिव,उच्च शिक्षा,मानव संसाधन विकास विभाग भारत सरकार ने की.दून पुस्तकालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सरोजिनी नायडू के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े राजनैतिक सामाजिक जीवन से जुड़े विविध पक्षों पर प्रकाश डाला गया.

वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अनिल नौरिया ने कहा सरोजिनी नायडू का जन्म 1879 में हैदराबाद में हुआ व उनका निधन 2 मार्च 1949 को हुआ। उस समय वे उत्तर प्रदेश की राज्यपाल थीं।सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

उन्होंने दिसंबर 1925 में कानपुर अधिवेशन में यह पद संभाला। वे 1916 से ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थीं। उन्होंने 1919 में रॉलेट कानून के विरुद्ध संघर्ष में भाग लिया। उन्होंने 1920 के दशक के आरंभिक वर्षों में असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आंदोलन के दौरान, वे अक्टूबर/नवंबर 1922 में प्रांतीय राजनीतिक सम्मेलन के लिए देहरादून आईं। उन्होंने 1924 में दक्षिण अफ्रीका और पूर्वी अफ्रीका का एक बेहद सफल दौरा किया।

नौरिया ने उनके राजनैतिक पक्ष पर कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें अक्सर जेल जाना पड़ा। गांधीजी और अब्बास त्याबजी की गिरफ्तारी के बाद, 1930 में वे सविनय अवज्ञा आंदोलन की नेता बनीं। सरोजिनी नायडू ने धरसाना के नमक कारखानों पर प्रसिद्ध छापे का नेतृत्व भी किया। उन्हें 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में गांधीजी और कस्तूरबा के साथ गिरफ्तार किया गया था।वे भारत की संविधान सभा की सदस्य थीं और जुलाई 1947 में विधानसभा में राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तुत करने से जुड़ी थीं।

अनिल नौरिया ने इस बात की भी जानकारी दी कि स्वतंत्रता के बाद सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं। राज्यपाल के रूप में उन्होंने 24 जुलाई 1948 को देहरादून में क्लॉक टावर की आधारशिला भी रखी। इसके अलावा सरोजिनी नायडू ने देहरादून में जुलाई 1948 में एमकेपी कॉलेज में बीए कक्षाओं का उद्घाटन भी किया था।

1920 के आसपास सरोजिनी नायडू ने राष्ट्रीय स्त्री सभा के गठन में भी अहम भूमिका निभाई वे महिला अधिकारों की बड़ी पैरोकार थीं और बाद में वे भी महिला आंदोलनों से जुड़ीं. पेरिन बेन के साथ गांधीवादी आदर्शों पर आधारित इस संगठन के ज़रिए उन्होंने महिलाओं को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जो महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था. उनका निधन 2 मार्च 1949 को हुआ।

कार्यक्रम के दौरान सभागार में उपस्थित श्रोतागणों ने इस विषय पर सवाल जबाब भी किये. इस दौरान विजय भट्ट, बिजू नेगी, योगेन्द्र सिंह नेगी, राकेश अग्रवाल, अम्मार नकवी, सुन्दर सिंह बिष्ट, सहाब नकवी, जगदीश बाबला, विजय भट्ट, आलोक कुमार, डी. के. काण्डपाल और दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी सहित शहर के अनेक प्रबुद्ध लोग, इतिहास प्रेमी, लेखक, साहित्यकार,समाज सेवी अन्य पाठक ‘ गण उपस्थित रहे.